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रितेश कुमार उपाध्याय

संस्थापक: जीवन बीमा बाजार

08 फ़रवरी 2026

   

LIC Table 2: कम प्रीमियम, आजीवन सुरक्षा और कैश-आउट

LIC Table 2 (Whole Life Plan) - कम प्रीमियम, आजीवन सुरक्षा और 80 वर्ष पर निकासी के नियम।
Also available in English

Jeevan Bima Bazaar (JBB) में आपका स्वागत है। अगर आपके पास LIC की पुरानी 'Whole Life Plan (Table 2)' पॉलिसी है, तो आप बहुत भाग्यशाली हैं। क्यों? क्योंकि आज के दौर में इतने Low Premium पर आजीवन (100 साल तक) बीमा मिलना लगभग नामुमकिन है। यह पॉलिसी आपके परिवार के लिए एक ऐसा तोहफा है जिसकी वैल्यू समय के साथ बढ़ती जा रही है।

अगर आप इसे सरेंडर करने की सोच रहे हैं, तो रुकिए! यह आर्टिकल आपके लिए 'आंखें खोलने वाला' साबित हो सकता है। क्या आप जानते हैं कि इस पॉलिसी में 80 साल की उम्र में पैसे निकालने का एक 'सीक्रेट रूल' भी है? आज हम इस 'गोल्ड माइन' पॉलिसी का पूरा विश्लेषण करेंगे और जानेंगे कि क्यों इसे बंद करना (Surrender) एक बड़ी वित्तीय गलती हो सकती है।

LIC Table 2 सबसे खास और सस्ती क्यों है?

LIC का Table 2 एक शुद्ध "Whole of Life Assurance Plan" है । जैसा कि नाम से पता चलता है, यह प्लान किसी निश्चित अवधि (Term) के लिए नहीं, बल्कि पूरे जीवन भर (Lifetime) सुरक्षा प्रदान करता है।

1. Lifetime Cover का जादू

ज्यादातर इंश्योरेंस प्लान 60 या 70 साल की उम्र में खत्म हो जाते हैं। लेकिन Table 2 आपके साथ तब तक रहता है जब तक आप जीवित हैं।

  • फायदा: चूंकि मृत्यु निश्चित है, इसलिए इस प्लान में Death Benefit (क्लेम) का भुगतान होना भी 100% निश्चित है । यह आपके बच्चों या अगली पीढ़ी (Nominee) के लिए एक गारंटीड विरासत (Legacy) की तरह है।

2. The "Low Premium" Advantage

इस प्लान की सबसे बड़ी खूबी इसका बेहद कम प्रीमियम है।

  • चूंकि रिस्क कवर पूरे जीवन भर फैला हुआ है, इसलिए इसका प्रीमियम अन्य एंडोमेंट प्लान्स की तुलना में बहुत कम होता है।
  • आपने जिस दर पर इसे वर्षों पहले खरीदा था, वह आज की महंगाई के हिसाब से बहुत मामूली है। इतने कम प्रीमियम पर आज इतना बड़ा कवर मिलना असंभव है।

💡 JBB Pro Tip: अपनी रसीद देखें। यदि टेबल नंबर '2' लिखा है, तो बधाई हो! आपके पास LIC का सबसे पुराना और भरोसेमंद साथी है। इसे किसी भी हाल में लैप्स न होने दें।

प्रीमियम भुगतान कब तक करना होता है?

अक्सर पॉलिसीधारकों को यह गलतफहमी होती है कि "Whole Life" का मतलब है "जिंदगी भर प्रीमियम भरना"। लेकिन सच कुछ और है। LIC ने प्रीमियम भरने की सीमा तय की हुई है।

LIC के ब्रोशर के अनुसार, प्रीमियम भुगतान की जिम्मेदारी निम्नलिखित में से जो भी बाद में (Later) हो, तब तक होती है:

  • 35 वर्षों की अवधि तक; या
  • 80 वर्ष की आयु तक।

इसका क्या मतलब है?

मान लीजिए आपने 35 साल की उम्र में पॉलिसी ली।

  • नियम के अनुसार आपको 80 साल की उम्र तक प्रीमियम भरना होगा। यानी कुल 45 साल तक।
  • लेकिन अगर आपने 55 साल की उम्र में पॉलिसी ली होती, तो आपको कम से कम 35 साल (यानी 90 की उम्र तक) प्रीमियम भरना पड़ सकता था।

यह एक मैराथन दौड़ है। बीच में थक कर पॉलिसी बंद न करें, क्योंकि असली इनाम (Bonus compounding) अंतिम वर्षों में मिलता है।

क्या 80 साल की उम्र में पैसा निकाला जा सकता है?

तकनीकी रूप से, इस प्लान की कोई "Maturity Date" नहीं होती, क्योंकि यह जीवन भर चलने वाला प्लान है । लेकिन, यहाँ एक विशेष प्रावधान (Provision) है जो इसे एक Endowment Plan में बदल सकता है।

The "Age 80" Withdrawal Rule

LIC आपको पॉलिसी से बाहर निकलने (Exit) और पैसा लेने का विकल्प देती है, बशर्ते दो शर्तें पूरी हों:

  • पॉलिसी शुरू हुए कम से कम 40 साल बीत चुके हों ।
  • पॉलिसीधारक की उम्र कम से कम 80 वर्ष हो गई हो ।

अगर आप इन शर्तों को पूरा करते हैं, तो आप LIC से अपनी जमा राशि मांग सकते हैं।

  • आपको क्या मिलेगा? Sum Assured (बीमा राशि) + अब तक घोषित सभी बोनस (All Bonuses declared under the policy) ।
  • Perspective: इसे आप अपनी 'रिटायरमेंट बोनस' या 'बुढ़ापे की लाठी' मान सकते हैं। 80 साल की उम्र में यह एकमुश्त पैसा मेडिकल खर्चों या तीर्थयात्रा के लिए बहुत काम आ सकता है।

परिवार को मृत्यु पर कितनी आर्थिक सुरक्षा मिलती है? (Death Benefit)

अगर पॉलिसीधारक 80 साल के विकल्प का उपयोग नहीं करता और पॉलिसी को आजीवन जारी रखता है, तो मृत्यु होने पर नॉमिनी को एक बड़ी राशि मिलती है।

Death Benefit में शामिल हैं:

  • Sum Assured (बीमा धन): मूल पॉलिसी राशि।
  • Vested Simple Reversionary Bonuses: हर साल LIC अपने मुनाफे में से जो बोनस घोषित करती है, वह जुड़ता जाता है।
  • Final Additional Bonus (FAB): चूंकि यह पॉलिसी बहुत लंबी अवधि (Long Term) की होती है, इसलिए इसमें FAB मिलने की संभावना बहुत अधिक होती है।

💡 JBB Pro Tip: याद रखें, Table 2 एक "With-Profit" प्लान है। इसका मतलब है कि LIC के मुनाफे में आपका हिस्सा पक्का है। जितने ज्यादा साल पॉलिसी चलेगी, बोनस का पहाड़ उतना ही बड़ा होगा।

Table 2, Table 5 और Table 14 में क्या अंतर है? (Comparison)

अक्सर पॉलिसीधारक LIC के पुराने प्लान्स (Table 2, 5 और 14) में कंफ्यूज हो जाते हैं। Jeevan Bima Bazaar ने आपके लिए यह तुलनात्मक तालिका (Comparison Table) तैयार की है ताकि आप अपनी पॉलिसी की अहमियत समझ सकें।

फीचर (Feature) Table 2 (Whole Life) Table 5 (Limited Pay Whole Life) Table 14 (Endowment)
कवर अवधि (Term) 100 साल (आजीवन) 100 साल (आजीवन) निश्चित टर्म (जैसे 25 साल)
प्रीमियम भुगतान 80 साल की उम्र तक (या 35 साल जो बाद में हो) सीमित (Limited) जैसे 15-20 साल पॉलिसी टर्म के बराबर
प्रीमियम राशि सबसे कम (Lowest) मध्यम सबसे ज्यादा (बचत के कारण)
मैच्योरिटी नहीं (80 पर विकल्प है) नहीं (80 पर विकल्प है) हाँ (टर्म खत्म होने पर)
मुख्य उद्देश्य सस्ती विरासत (Legacy) फ्री एसेट क्रिएशन निश्चित बचत लक्ष्य

JBB विश्लेषण:

Table 2 उन लोगों के लिए सबसे बेहतरीन ("Best") है जो कम से कम खर्च में अपनी अगली पीढ़ी के लिए एक बड़ी विरासत (Tax-Free Legacy) छोड़ना चाहते हैं। Table 14 बचत के लिए अच्छी है, लेकिन Table 2 शुद्ध सुरक्षा और विरासत के लिए 'गोल्ड' है।

पॉलिसी सरेंडर करने पर कितना नुकसान होगा? (Surrender Logic)

कई बार एजेंट नई पॉलिसी बेचने के लिए पुरानी पॉलिसी को सरेंडर करने की सलाह देते हैं। JBB सुझाव देता है कि ऐसा कभी न करें। Table 2 में सरेंडर का गणित पूरी तरह आपके खिलाफ है।

1. Guaranteed Surrender Value (GSV)

LIC के नियमों के अनुसार, सरेंडर वैल्यू केवल तभी मिलती है जब कम से कम 3 साल तक प्रीमियम भरा गया हो।इसका नुकसान यह है कि गारंटीड सरेंडर वैल्यू, पहले साल के प्रीमियम को छोड़कर, कुल भरे गए Basic Premiums का केवल 30% होती है।

सोचिए: अगर आपने ₹1 लाख भरा है, तो आपको गारंटी के तौर पर सिर्फ ₹27-30 हजार वापस मिलेंगे। बाकी 70% डूब जाएगा।

2. Discounted Value

भले ही LIC 'Special Surrender Value' दे, लेकिन वह भी "Discounted Value" होती है। इसका मतलब है कि LIC भविष्य में मिलने वाले मृत्यु क्लेम की वैल्यू को आज की तारीख में कम करके (Discount करके) देती है। आप अपनी ही विरासत को औने-पौने दाम पर बेच रहे होते हैं।

1 लाख की पॉलिसी पर कितना रिटर्न मिल सकता है? (Illustration)

आइए LIC के आधिकारिक ब्रोशर के आंकड़ों से समझते हैं कि यह "छोटा निवेश" कैसे "बड़ी विरासत" बनता है।

Scenario Details (From PDF):

  • Age: 35 वर्ष
  • Sum Assured: ₹1,00,000
  • Premium Paying Term: 45 वर्ष (35 से 80 वर्ष की आयु तक)।
  • Annual Premium: ₹2,917।

निवेश बनाम रिटर्न (Investment vs Return):

कुल निवेश (45 साल में): ₹1,31,265 (लगभग)।

Age 80 (45वें साल) पर संभावित रिटर्न:

विवरण Scenario 1 (6% Return) Scenario 2 (10% Return)
Sum Assured ₹1,00,000 ₹1,00,000
Bonus ₹2,34,000 ₹6,48,000
Total ₹3,34,000 ₹7,48,000
(Source: Sales-Brochure_02.pdf, Page 3 Table)

JBB Analysis:

ध्यान दें! आपने साल का सिर्फ ₹2,917 भरा (जो आज एक डिनर का खर्च है)।

  • बदले में 80 की उम्र में आपको ₹7.48 लाख तक मिल रहे हैं (Scenario 2 के अनुसार)।
  • यह आपके कुल निवेश का लगभग 6 गुना है।
  • और सबसे बड़ी बात—इस दौरान 100 साल तक आपकी जान की कीमत (Risk Cover) भी बनी रही।

इस पॉलिसी पर टैक्स के क्या नियम हैं? (Taxation)

चूंकि यह पॉलिसी पुरानी है, इसलिए बहुत से लोग इसके टैक्स बेनिफिट्स को लेकर कंफ्यूज रहते हैं।

JBB Expert Insight के अनुसार:

1. प्रीमियम पर छूट (Section 80C)

आप जो ₹2,917 का वार्षिक प्रीमियम भरते हैं, वह इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80C के तहत पूरी तरह टैक्स छूट (Tax Deduction) के योग्य है।

2. परिपक्वता/मृत्यु लाभ (Section 10(10D))

यह सबसे महत्वपूर्ण पॉइंट है। टैक्स नियमों के अनुसार, यदि वार्षिक प्रीमियम 'Sum Assured' के 10% से कम है, तो मिलने वाला पैसा टैक्स-फ्री होता है।

  • Table 2 का गणित: यहाँ प्रीमियम (₹2,917) सम एश्योर्ड (₹1,00,000) का केवल 2.9% है।
  • निष्कर्ष: चूंकि यह 10% से बहुत कम है, इसलिए 80 साल की उम्र में मिलने वाला पैसा या डेथ क्लेम पूरी तरह Tax-Free है।

LIC टेबल 2 (Whole Life) ब्रोशर – PDF डाउनलोड करें

यह LIC का वह ओरिजिनल दस्तावेज है जो Table 2 के लिए जारी किया गया था। मौजूदा पॉलिसीधारकों के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि उनके बॉन्ड में '80 साल' वाला नियम कहां लिखा है। इसे डाउनलोड करें और जानें:

  • Age 80 Cash-out: 40 साल बाद निकासी का प्रावधान।
  • Premium Term: 35 साल या 80 की उम्र तक भुगतान की शर्त।
  • Surrender Value: 30% का गारंटीड नियम।
प्रतीक्षा करें...
डाउनलोड करें

क्लेम के समय जरूरी दस्तावेज

क्लेम या 80 साल पर निकासी के लिए ये दस्तावेज तैयार रखें:

  • Original Policy Bond: सबसे जरूरी दस्तावेज।
  • Age Proof: 80 साल का नियम क्लेम करने के लिए।
  • Neft Mandate: पैसा सीधे बैंक में पाने के लिए।

प्रीमियम छूटने पर क्या पॉलिसी बंद हो जाएगी? (Paid-up)

अगर आर्थिक तंगी के कारण आप प्रीमियम नहीं भर पा रहे हैं, तो भी पॉलिसी सरेंडर न करें। LIC में "Paid-up" का सुरक्षा कवच होता है।

  • नियम: अगर आपने कम से कम 3 साल प्रीमियम भरा है, तो प्रीमियम बंद करने पर पॉलिसी लैप्स (Lapse) नहीं होगी, बल्कि Paid-up हो जाएगी।
  • असर: आपकी बीमा राशि (Sum Assured) आनुपातिक रूप से कम हो जाएगी, लेकिन पॉलिसी खत्म नहीं होगी।
  • फायदा: कम हुई बीमा राशि और अब तक जुड़ा हुआ बोनस मृत्यु तक सुरक्षित रहेगा।

JBB सलाह:: 'सरेंडर' करके पॉलिसी का गला घोंटने से बेहतर है उसे 'Paid-up' करके जिंदा रखना। कम से कम कुछ पैसा तो नॉमिनी को जरूर मिलेगा।

FAQ: संबंधित प्रश्न और उत्तर

जी हाँ, Table 2 एक पारंपरिक होल लाइफ प्लान है। 3 साल प्रीमियम भरने के बाद जब पॉलिसी सरेंडर वैल्यू हासिल कर लेती है, तो आप उस पर लोन ले सकते हैं। आमतौर पर सरेंडर वैल्यू का 90% तक लोन मिल जाता है।

नहीं, यह अनिवार्य नहीं है। LIC ब्रोशर कहता है कि आपके पास विकल्प (Option) है। अगर आपको पैसों की जरूरत नहीं है, तो आप इसे जारी रख सकते हैं। इससे डेथ बेनिफिट और बढ़ जाएगा क्योंकि बोनस जुड़ता रहेगा।

Table 2 एक Participating Plan है। LIC हर साल अपने मुनाफे में से बोनस घोषित करती है। एक बार बोनस घोषित हो गया, तो वह आपकी पॉलिसी में जुड़ जाता है और गारंटीड हो जाता है।

निष्कर्ष:

LIC Table 2 एक 'पारिवारिक धरोहर' है। इसका प्रीमियम इतना कम है कि यह आपकी जेब पर भारी नहीं पड़ता, लेकिन इसका रिटर्न बुढ़ापे में बड़ा सहारा बनता है। इसे सरेंडर करना सोने का अंडा देने वाली मुर्गी को मारने जैसा है। 80 साल के नियम का लाभ उठाएं या इसे अपनी अगली पीढ़ी के लिए विरासत छोड़ जाएं।

यह लेख हमारी 'LIC Legacy Plans Directory' का हिस्सा है। यहाँ क्लिक करके सभी पुराने प्लान्स की लिस्ट देख सकते हैं।

अगले भाग में जानें: एक और पुरानी पॉलिसी की जानकारी... (सीरीज का अगला लेख पढ़ने के लिए नीचे Next बटन पर क्लिक करें)।

अस्वीकरण:यह जानकारी LIC के आधिकारिक सेल्स ब्रोशर (Table 2) और IRDA के चित्रण (Benefit Illustration) नियमों पर आधारित है। रिटर्न के आंकड़े (6% और 10%) अनुमानित हैं और भविष्य के निवेश प्रदर्शन पर निर्भर करते हैं। 80 वर्ष की आयु पर भुगतान का विकल्प LIC के तत्कालीन नियमों के अधीन है। कृपया अपनी शाखा से पुष्टि करें।

01 फ़रवरी 2026

   

LIC Plan 914 Rules & Benefits: JBB Complete Guide

LIC New Endowment Plan 914 के लाभ, लोन और सरेंडर नियमों की जानकारी।
Also available in English

Jeevan Bima Bazaar (JBB) में आपका स्वागत है। यदि आप LIC की सबसे लोकप्रिय एंडोमेंट पॉलिसी 'Plan 914' के बारे में सटीक जानकारी ढूंढ रहे हैं, तो आप सही जगह पर हैं। 1 फरवरी 2020 को लॉन्च हुआ यह प्लान अब 1 अक्टूबर 2024 से नए सब्सक्रिप्शन के लिए बंद (Withdrawn) कर दिया गया है। हालांकि, जिन लोगों के पास यह पॉलिसी पहले से है, उनके लिए सर्विसिंग और बेनिफिट्स के नियम जानना बेहद जरूरी है।

जीवन बीमा बाज़ार का विश्लेषण यह कहता है कि यह प्लान सुरक्षा और बचत का एक बेहतरीन संतुलन था। आज के इस विस्तृत गाइड में हम LIC के Circular No. CO/PD/128 के आधार पर इसके सटीक नियमों को समझेंगे।

LIC Plan 914 क्या है और इसके मुख्य नियम क्या हैं?

LIC New Endowment Plan (914) एक Non-linked, Participating, Individual, Life Assurance Savings Plan है । इसका मतलब है कि यह शेयर बाजार से नहीं जुड़ा है और आपको मुनाफे में बोनस के रूप में हिस्सा मिलता है ।

हमारे डिजिटल सिस्टम/डेटा के अनुसार, इस प्लान की पात्रता शर्तें (Eligibility) इस प्रकार थीं:

  • Minimum Entry Age: 8 साल (पूरे हुए) ।
  • Maximum Entry Age: 55 साल (Birthday के करीब) ।
  • Policy Term: कम से कम 12 साल और अधिकतम 35 साल ।
  • Sum Assured: कम से कम ₹1,00,000/- । इसकी कोई अधिकतम सीमा नहीं है ।
  • Premium Payment: पॉलिसी की अवधि तक प्रीमियम भरना अनिवार्य है ।

Death Benefit और Maturity की गणना कैसे करें?

पॉलिसी के लाभों को समझना सबसे महत्वपूर्ण है। JBB सुझाव देता है कि आप इन टेक्निकल परिभाषाओं को ध्यान से पढ़ें:

1. Death Benefit (मृत्यु लाभ) में क्या मिलेगा?

यदि पॉलिसी अवधि के दौरान पॉलिसीधारक की मृत्यु हो जाती है, तो LIC नॉमिनी को निम्नलिखित का भुगतान करती है:

  • 'Sum Assured on Death' + जमा हुआ बोनस (Vested Simple Reversionary Bonus) + Final Additional Bonus (FAB)
  • सटीक परिभाषा: 'Sum Assured on Death' अब Basic Sum Assured या Annualized Premium का 7 गुना (जो भी अधिक हो) होती है ।

2. Maturity Benefit (परिपक्वता लाभ) की गणना:

पॉलिसी अवधि पूरी होने पर जीवित पॉलिसी धारक को मिलता है:

  • Sum Assured on Maturity (Basic SA) + जमा हुआ बोनस + Final Additional Bonus

💡 JBB Pro Tip: याद रखें कि Sum Assured on Death कम से कम कुल भरे गए प्रीमियम (Taxes और Rider Premium को छोड़कर) का 105% जरूर होगा ।

LIC Plan 914 में Loan और Surrender के सटीक नियम क्या हैं?

जीवन बीमा बाज़ार का विश्लेषण यह कहता है कि LIC ने इस प्लान में लिक्विडिटी को पहले से बेहतर बनाया है।

Loan Facility (लोन की सुविधा)

आप केवल 2 साल का प्रीमियम भरने के बाद अपनी पॉलिसी पर लोन ले सकते हैं ।

  • In-force Policies: सरेंडर वैल्यू का 90% तक लोन
  • Paid-up Policies: सरेंडर वैल्यू का 80% तक लोन

Surrender Value और Paid-up Status

  • Surrender: अब पॉलिसी को सरेंडर करने के लिए केवल 2 साल का प्रीमियम भरना अनिवार्य है ।
  • Paid-up Value: यदि 2 साल बाद प्रीमियम बंद हो जाता है, तो पॉलिसी पूरी तरह लैप्स नहीं होती, बल्कि Paid-up बन जाती है ।
  • Revival: आप बंद पॉलिसी को प्रीमियम न भरने की तारीख से 5 साल के भीतर दोबारा शुरू कर सकते हैं ।

💡 JBB Pro Tip: यदि आप पॉलिसी को सरेंडर करते हैं, तो आपको Guaranteed Surrender Value (GSV) और Special Surrender Value (SSV) में से जो भी अधिक होगा, वही मिलेगा।

Rider Eligibility Table (सटीक जानकारी)

इस प्लान में अपनी सुरक्षा बढ़ाने के लिए आप 5 Riders चुन सकते हैं। उनकी पात्रता इस प्रकार है:

राइडर का नाम न्यूनतम प्रवेश आयु अधिकतम प्रवेश आयु कवर समाप्ति आयु
Accidental Death & Disability 18 वर्ष (पूर्ण) 65 वर्ष 70 वर्ष
Accident Benefit Rider 18 वर्ष (पूर्ण) 65 वर्ष 70 वर्ष
New Term Assurance Rider 18 वर्ष (पूर्ण) बेस पॉलिसी के समान पॉलिसी अवधि तक
New Critical Illness Rider 18 वर्ष (अंतिम जन्मदिन) बेस पॉलिसी के समान पॉलिसी अवधि तक
Premium Waiver Benefit (PWB) 18 वर्ष (पूर्ण) 55 वर्ष (NBD) 70 वर्ष

Grace Period का गणित

LIC सर्कुलर 914 के अनुसार, प्रीमियम भरने में देरी होने पर आपको निम्नलिखित राहत मिलती है:

Grace Period: Yearly, Half-yearly और Quarterly मोड के लिए 30 दिन का समय मिलता है। Monthly मोड के लिए केवल 15 दिन का समय मिलता है।

Rebates (छूट) का गणित

High Sum Assured Rebate (छूट):

Basic Sum Assured (SA) Rebate (छूट)
₹1,00,000 से ₹1,95,000 Nil
₹2,00,000 से ₹4,95,000 2.00‰ (Basic SA का)
₹5,00,000 और ऊपर 3.00‰ (Basic SA का)

Surrender Value Factors: एक छोटा उदाहरण

हमारे डिजिटल सिस्टम/डेटा के अनुसार, यदि आप पॉलिसी को समय से पहले बंद करते हैं, तो आपको मिलने वाला पैसा इस फैक्टर पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए:

  • 15 साल की पॉलिसी में यदि आप 3 साल बाद सरेंडर करते हैं, तो भरे गए प्रीमियम का लगभग 35% वापस मिलता है।
  • यदि 10 साल बाद सरेंडर करते हैं, तो यह बढ़कर लगभग 60% - 65% तक हो जाता है। (नोट: यह प्रतिशत पॉलिसी की अवधि और साल के अनुसार बदलता रहता है)।

Settlement Option और Exclusions

Settlement Option (मैच्योरिटी किश्तों में)

आप अपनी मैच्योरिटी या डेथ बेनिफिट को 5, 10 या 15 साल की किश्तों में ले सकते हैं।

  • न्यूनतम किश्त राशि: Monthly (₹5,000), Quarterly (₹15,000), Half-Yearly (₹25,000), Yearly (₹50,000)।

Exclusions (क्या कवर नहीं है?)

  • Suicide Clause: यदि पॉलिसीधारक रिस्क शुरू होने के 12 महीने के भीतर आत्महत्या करता है, तो LIC केवल भरे गए प्रीमियम का 80% ही वापस करती है। यदि पुनर्जीवन (Revival) के 12 महीने के भीतर ऐसा होता है, तो 80% प्रीमियम या सरेंडर वैल्यू में से जो अधिक हो, वही मिलता है।
  • Death Claim: मृत्यु के 90 दिनों के भीतर सूचना देना अनिवार्य है
प्रतीक्षा करें...
डाउनलोड करें

FAQ: संबंधित प्रश्न और उत्तर

नहीं, यह प्लान 1 अक्टूबर 2024 से बंद (Withdrawn) कर दिया गया है। अब इसके बदले नए एंडोमेंट प्लान उपलब्ध हैं।

हाँ, 2 साल के बाद आपकी पॉलिसी Paid-up वैल्यू हासिल कर लेती है और पूरी तरह खत्म नहीं होती।

हाँ, यदि मृत्यु ग्रेस पीरियड के दौरान होती है, तो अनपेड प्रीमियम काटकर क्लेम का भुगतान किया जाता है।

हाँ, पॉलिसी असाइनमेंट (Assignment) के जरिए आप इसे बैंक से लोन लेने के लिए उपयोग कर सकते हैं।

हाँ, उचित अंडरराइटिंग नियमों और स्वास्थ्य घोषणा के साथ इसे 5 साल के भीतर रिवाइव किया जा सकता है।

निष्कर्ष:

LIC Plan 914 की सर्विसिंग से जुड़ी हर छोटी बात आपकी पॉलिसी को सुरक्षित रखती है। चाहे लोन लेना हो या सेटलमेंट विकल्प चुनना, सही जानकारी ही आपकी सबसे बड़ी संपत्ति है। यह लेख हमारी 'LIC Legacy Plans Directory' का हिस्सा है। आप यहाँ क्लिक करके LIC के सभी बंद हो चुके प्लान्स की सूची (Index) देख सकते हैं।

अगला कदम: LIC के एंडोमेंट प्लान्स का इतिहास बहुत पुराना है। इस सीरीज के अगले भाग में हम उस पुरानी पॉलिसी के नियमों को जानेंगे जिसने प्लान 914 के लिए रास्ता तैयार किया। उस पुराने वर्जन (Predecessor) के बारे में पढ़ने के लिए नीचे Next बटन पर क्लिक करें।

अस्वीकरण:यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है। इसे वित्तीय सलाह (Financial Advice) न माना जाए। किसी भी निवेश या बीमा निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या LIC शाखा से संपर्क करें। JBB किसी भी लाभ/हानि के लिए जिम्मेदार नहीं है।

14 जनवरी 2026

   

JFM 2026: इंश्योरेंस टारगेट 100% पूरा करने के 5 मंत्र

इंश्योरेंस टारगेट 100% पूरा करने के 5 मंत्र
Also available in English

साथियों, कैलेंडर बदल चुका है! हम 2026 की सबसे महत्वपूर्ण तिमाही यानी JFM (January, February, March) में प्रवेश कर चुके हैं। इंश्योरेंस की दुनिया में एक पुरानी कहावत है— "जो साल भर सोता है, वो JFM में जागकर भी बाजी मार सकता है, लेकिन जो JFM में सो गया, उसका पूरा साल बेकार है।"

क्या आप एक साधारण एजेंट बनकर रहना चाहते हैं या एक 'सुपर अचीवर' (MDRT/COT/TOT) बनना चाहते हैं? यह फैसला आपको अगले 90 दिनों में लेना है। हम जानते हैं कि मार्च क्लोजिंग का दबाव (Pressure) बहुत ज्यादा होता है, ब्रांच मैनेजर का फोन बार-बार आता है, लेकिन याद रखें—दबाव में ही हीरा बनता है।

इस विस्तृत गाइड में हम आपको हवा-हवाई बातें नहीं, बल्कि फील्ड और डिजिटल दुनिया (Digital World) के ऐसे प्रैक्टिकल मंत्र बताएंगे जो 2026 में गेम चेंजर साबित होंगे। साथ ही, खाड़ी देशों (Gulf) में रहने वाले हमारे कामगार भाइयों और NRI क्लाइंट्स के लिए भी इसमें विशेष टिप्स जोड़े गए हैं।

अपना 'हॉट डेटाबेस' अभी फ़िल्टर करें (Smart Data Strategy)

हवा में तीर चलाने का समय अब गया। JFM 2026 में समय कम है, इसलिए आपको 'हार्ड वर्क' नहीं 'स्मार्ट वर्क' करना होगा। अपनी पुरानी डायरी, मोबाइल कॉन्टैक्ट्स या एक्सेल शीट निकालें और अपने ग्राहकों को इन तीन श्रेणियों (Categories) में बांटें। यह हाई-कन्ववर्जन (High Conversion) लिस्ट है:

  • Tax Seekers (टैक्स बचाने वाले):

    वे वेतनभोगी (Salaried) लोग जिनकी आय पिछले साल बढ़ी है। मार्च आते-आते HR उनसे इन्वेस्टमेंट प्रूफ मांगता है। उन्हें सेक्शन 80C के तहत टैक्स बचाने की सख्त जरूरत होती है। उन्हें सही समय पर सही (Tax Saving Plan) पिच करें, इससे पहले कि वे जल्दबाजी में कोई गलत फैसला लें।

  • Family Additions (जिम्मेदारी बढ़ने वाले):

    अपने उन पुराने क्लाइंट्स को कॉल करें जिनके घर पिछले 1-2 साल में शादी हुई है या नन्हे मेहमान (बच्चे) का आगमन हुआ है। जब परिवार बढ़ता है, तो पुराने सम एश्योर्ड (Sum Assured) से काम नहीं चलता। जिम्मेदारी बढ़ी है, तो बीमा सुरक्षा (Insurance Cover) भी बढ़ना चाहिए।

  • Upcoming Maturities (परिपक्वता राशि):

    जिन ग्राहकों की कोई पुरानी पॉलिसी (जैसे मनी बैक या एंडोमेंट) अगले 3 से 6 महीने में मैच्योर होने वाली है, वे आपके लिए 'हॉट केक' हैं। उनके पास पैसा आने वाला है। उन्हें समझाएं कि मैच्योरिटी का पैसा खर्च करने के बजाय उसे एक 'पेंशन प्लान' (Pension Plan) या 'लमसम निवेश' (Lumpsum Investment) में रि-इन्वेस्ट करना उनके सुरक्षित बुढ़ापे के लिए कितना जरूरी है।

Satark टिप: क्लाइंट को कभी भी फोन पर पूरी स्कीम न समझाएं। फोन का मकसद सिर्फ और सिर्फ 'अपॉइंटमेंट' (Meeting) फिक्स करना होना चाहिए। फोन पर प्लान बताने से पॉलिसी बिकने के चांस 50% कम हो जाते हैं।

'Tax Saving' नहीं, 'Suraksha + Returns' बेचें

JFM सीजन में हर एजेंट ग्राहक के पास "सर, टैक्स बचा लो" का नारा लेकर जाता है। अगर आप भी यही करेंगे, तो भीड़ का हिस्सा बन जाएंगे और ग्राहक आपको टाल देगा। आपको एक सेल्समैन नहीं, बल्कि एक वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) की तरह बात करनी है।

बातचीत का तरीका बदलें (Pitch Script)

ग्राहक को समझाएं: "सर, टैक्स बचाना तो सिर्फ एक 'बोनस' है। हमारा असली मकसद दो चीजें हैं:

  • आपके न रहने पर आपके परिवार की लाइफस्टाइल वैसी ही रहे, जैसी आज है।
  • आपके रहने पर एक शानदार रिटायरमेंट फंड (Retirement Fund) तैयार हो, ताकि बुढ़ापे में किसी के सामने हाथ न फैलाना पड़े।
"

जब आप ROI (Return on Investment) और भावनात्मक सुरक्षा को जोड़कर बात करते हैं, तो प्रीमियम का चेक अपने आप बड़ा हो जाता है।

सावधानी (Caution):

कभी भी शॉर्ट टर्म फायदों के लिए लॉन्ग टर्म कमिटमेंट न करवाएं। अगर ग्राहक केवल 5 साल ही पैसा दे सकता है, तो उसे 15 साल का प्रीमियम पेइंग टर्म (PPT) न दें। इससे मिस-सेलिंग (Mis-selling) का खतरा बढ़ता है और बाद में पॉलिसी लैप्स हो जाती है, जिससे आपकी साख (Goodwill) खराब होती है।

NRI और गल्फ (Gulf) क्लाइंट्स: एक अनछुआ खजाना

जनवरी और फरवरी का महीना वो समय होता है जब खाड़ी देशों (Dubai, Qatar, Saudi Arabia, Kuwait) और US/UK में काम करने वाले हमारे भारतीय भाई-बहन छुट्टियों पर अपने वतन भारत आते हैं।

NRI डे (9 जनवरी) का फायदा कैसे उठाएं?

हर साल 9 जनवरी को भारत में 'प्रवासी भारतीय दिवस' मनाया जाता है। जनवरी का पूरा महीना NRIs के स्वागत का होता है।

  • अवसर: अधिकांश NRI अभी भी भारत में हैं या फरवरी तक रहेंगे। यह उनसे मिलने का सही समय है।
  • कनेक्शन: वे अपनी जड़ों से जुड़ना चाहते हैं। उन्हें समझाएं कि भारत में निवेश करना उनके लिए 'इमोशनल' और 'फाइनेंशियल' दोनों तरह से फायदेमंद है।

NRIs के लिए बेस्ट इंश्योरेंस रणनीति:

गल्फ में काम करने वाले हमारे 'ब्लू कॉलर' (Blue Collar) भाई कड़ी मेहनत करते हैं। उनकी सबसे बड़ी चिंता होती है— "अगर मुझे वहां कुछ हो गया, तो गांव में मेरे परिवार का क्या होगा?" या "जब मैं 5 साल बाद भारत लौटूंगा, तो मेरी आमदनी का जरिया क्या होगा?"

  • टर्म प्लान (Term Insurance): उन्हें समझाएं कि उनकी गैर-मौजूदगी में एक बड़ा Life Cover उनके परिवार को कर्ज मुक्त रख सकता है।
  • गारंटीड इनकम प्लान: NRIs को ऐसे प्लान पसंद आते हैं जहां भारत लौटने के बाद उन्हें एक निश्चित मासिक आय (Monthly Income) मिले, ताकि उन्हें दोबारा विदेश न जाना पड़े।

JBB Satark Advice (जरूरी नियम): NRI पॉलिसी करते समय पासपोर्ट (Passport) और वीज़ा (Visa) की वैधता (Validity) पहले दिन ही चेक कर लें। अगर वे 10 दिन में वापस जाने वाले हैं, तो मेडिकल और डॉक्यूमेंटेशन की प्रक्रिया 'फास्ट ट्रैक' पर करवाएं। अधूरा काम आपका केस फंसा सकता है और पॉलिसी रिजेक्ट हो सकती है।

लेप्स (Lapsed) पॉलिसी रिवाइवल अभियान

नया ग्राहक ढूंढना मुश्किल है, (Cost of Acquisition) ज्यादा है, लेकिन पुराने रूठे हुए ग्राहक को मनाना आसान है।

कई बीमा कंपनियां (जैसे LIC, SBI Life, HDFC Life) JFM सीजन में 'स्पेशल रिवाइवल कैंपेन' चलाती हैं, जहां लेट फीस (Late Fee) में 20% से 30% तक की भारी छूट दी जाती है।

अपनी लिस्ट निकालें कि पिछले 3 साल में किन लोगों ने प्रीमियम भरना बंद कर दिया है।

उन्हें कॉल करें: "सर, आपकी पुरानी पॉलिसी में आपका गाढ़ा पसीना (Hard earned money) फंसा हुआ है। कंपनी अभी छूट दे रही है, थोड़े पैसे भरकर आप अपनी पुरानी कवरेज और बोनस फिर से शुरू कर सकते हैं। यह मौका हाथ से मत जाने दीजिये।"

यह प्रीमियम आपके JFM टारगेट में सीधा जुड़ता है और इसमें मेहनत कम लगती है।

डेली एक्शनेबल गणित (The Success Formula)

सपने देखने से MDRT (Million Dollar Round Table) पूरा नहीं होता, गणित से होता है।

अगर आपको मार्च तक 10 लाख का प्रीमियम (Weighted Premium) चाहिए और आपकी औसत टिकट साइज़ (Average Ticket Size) 50,000 रुपये है, तो आपको 20 पॉलिसी बेचनी हैं।

JBB Success Table: JFM 2026

नीचे दी गई सारणी (Table) को अपने वर्क-डे का हिस्सा बनाएं:

चरण गतिविधि अपेक्षित परिणाम
Prospecting रोज़ाना 10 नए लोगों को कॉल (Calls) 3 मीटिंग पक्की होंगी
Meeting रोज़ाना 3 फेस-टू-फेस मीटिंग 1 'हॉट' प्रोस्पेक्ट मिलेगा
Follow-up पुराने पेंडिंग ग्राहकों को 2 कॉल शंका समाधान
Closing हफ्ते में 6 हॉट प्रोस्पेक्ट्स से फाइनल बात 2 कन्फर्म सेल्स

Commission Calculator Example (आपकी कमाई)

बहुत से एजेंट बीच में ही थक जाते हैं क्योंकि उन्हें अपनी 'मेहनत का फल' साफ नहीं दिखता। आइये देखते हैं अगर आप ऊपर दिए गए फॉर्मूले का पालन करते हैं, तो JFM में आप कितना कमा सकते हैं:

विवरण संख्या/राशि
कुल पॉलिसी बेचीं 20 पॉलिसी
औसत प्रीमियम ₹50,000
कुल प्रीमियम संग्रह ₹10,00,000 (10 लाख)
अनुमानित कमीशन (Approx. 35%)* ₹3,50,000
बोनस/इनाम अतिरिक्त (Extra)
*नोट: कमीशन दरें प्लान और कंपनी के अनुसार 2% से 35% तक भिन्न हो सकती हैं। यह एक औसत उदाहरण है जिसमें फर्स्ट ईयर कमीशन और बोनस इंसेंटिव शामिल हो सकते हैं।

सोचिये! सिर्फ 3 महीने की मेहनत और ₹3.5 लाख की कमाई। क्या यह मोटिवेशन काफी नहीं है सुबह बिस्तर से जल्दी उठने के लिए?

डिजिटल अस्त्र: WhatsApp स्टेटस और ब्रॉडकास्ट लिस्ट का जादू

आज के दौर में अगर आप डिजिटल नहीं हैं, तो आप अदृश्य (Invisible) हैं। JFM में घर-घर जाने के साथ-साथ आपको अपने WhatsApp का भी सही इस्तेमाल करना होगा।

WhatsApp Status Strategy (जिज्ञासा जगाएं):

ज्यादातर एजेंट गलती यह करते हैं कि वे कंपनी के बोरिंग पोस्टर स्टेटस पर लगा देते हैं, जिसे कोई नहीं देखता। आपको 'Curiosity' (जिज्ञासा) जगानी है।

  • गलत स्टेटस: "Buy Jeevan Umang Policy Table No. 745."
  • सही स्टेटस: "सिर्फ ₹100 रोज बचाकर पाएं ₹50,000 साल भर की पेंशन... वो भी गारंटीड! जानना चाहते हैं कैसे? (Reply 'YES')"
  • इंगेजमेंट: जब लोग स्टेटस पर रिप्लाई करें, तो तुरंत चैट शुरू करें और मीटिंग फिक्स करें।

Broadcast List (ग्रुप न बनाएं):

कभी भी अपने क्लाइंट्स का 'WhatsApp Group' न बनाएं, लोग छोड़कर भाग जाते हैं। इसके बजाय 'Broadcast List' का उपयोग करें।

  • एक लिस्ट में 256 लोग आते हैं। ऐसी 4 लिस्ट बनाएं (1000 लोग)।
  • हफ्ते में सिर्फ 2 बार मैसेज भेजें।
  • मैसेज का प्रकार: सिर्फ पॉलिसी बेचने के मैसेज न भेजें। कभी-कभी 'फाइनेंशियल टिप्स', 'टैक्स सेविंग नियम' या 'Motivational Quotes' भेजें। इससे आपका रिश्ता (Relationship) मजबूत बना रहता है। जब आप वैल्यू देंगे, तभी ग्राहक आपकी पॉलिसी खरीदेगा।

रियल लाइफ केस स्टडी: सुरेश जी की 'रिव्यू' रणनीति

सूरत के एक अनुभवी एजेंट, श्री सुरेश भाई ने पिछले साल JFM में एक अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने नए ग्राहकों के पीछे भागना छोड़ दिया।

उन्होंने अपने 5 साल पुराने सभी ग्राहकों को फोन किया और कहा, "सर, आपने 5 साल पहले जो पॉलिसी ली थी, उसका मैं 'फ्री ऑडिट' (Policy Review) करना चाहता हूं। महंगाई बढ़ गई है, एक बार देख लेते हैं कि पुराना कवर आज के हिसाब से पर्याप्त है या नहीं।"

नतीजा: जब वे पुराने ग्राहकों से मिले, तो उन्होंने पाया कि कई ग्राहकों की आय (Income) बढ़ चुकी थी। सुरेश भाई ने इस तरह से कई पॉलिसियां बेचीं और अपनी आय में गजब की बढ़ोतरी पाई।

निष्कर्ष

साथियों, JFM का समय डरने का नहीं, बल्कि डटकर खेलने का है। 2026 आपके करियर का सबसे बेहतरीन साल हो सकता है, बस जरूरत है तो सही योजना (Planning), सही डिजिटल टूल्स और लगातार प्रयास (Consistency) की।

अपने पुराने डेटाबेस को खंगालें, WhatsApp का हथियार उठाएं, NRI संपर्कों को सक्रिय करें और सुरेश भाई की तरह 'स्मार्ट रिव्यू' तकनीक अपनाएं। याद रखें, हर 'ना' आपको एक 'हां' के करीब ले जाती है।

आपका JFM 2026 का टारगेट क्या है? क्या आप MDRT का लक्ष्य रख रहे हैं? हमें नीचे कमेंट (Comment) करके बताएं। हम आपकी सफलता की कामना करते हैं!

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

जी हाँ, अगर आप 31 मार्च 2026 से पहले प्रीमियम जमा कर देते हैं और पॉलिसी जारी हो जाती है, तो आप वित्त वर्ष 2025-26 के लिए धारा 80C के तहत छूट का दावा कर सकते हैं। चेक क्लियर होने की तारीख महत्वपूर्ण है।

NRI जब भारत आते हैं तो वे आसानी से पॉलिसी ले सकते हैं। उन्हें अपने पासपोर्ट की कॉपी, पते का प्रमाण और आय का प्रमाण (Income Proof) देना होता है। अगर वे विदेश में हैं, तो 'Mail Order Business' (वैकल्पिक चैनल) के जरिए भी पॉलिसी ले सकते हैं, लेकिन नियम थोड़े सख्त होते हैं।

कभी भी किसी कंपनी की बुराई न करें। ग्राहक को 'सॉल्वेंसी रेश्यो' (Solvency Ratio) और 'क्लेम सेटलमेंट रेश्यो' (CSR) के बारे में बताएं। उन्हें समझाएं कि IRDAI (बीमा विनियामक) सभी कंपनियों पर समान रूप से नजर रखता है और उनका पैसा हर जगह सुरक्षित है। मुख्य अंतर 'प्लान के फीचर्स' और 'सर्विस' में है—और सर्विस की गारंटी आप (एजेंट) हैं।

यह एक सख्त स्थिति है। विनम्रता से, लेकिन दृढ़ता से मना करें।

जवाब दें: "सर, बीमा कानून (Insurance Act, 1938 की धारा 41) के तहत रिबेट देना और लेना दोनों गैर-कानूनी हैं। मैं अपनी ईमानदारी और जीवन भर की सर्विस आपको दे रहा हूं, जो चंद रुपयों के डिस्काउंट से कहीं ज्यादा कीमती है। क्लेम के समय मैं ही आपके परिवार के साथ खड़ा रहूंगा, डिस्काउंट नहीं।"

यह ग्राहक की जरूरत पर निर्भर करता है। टैक्स बचाने और निवेश के लिए एंडोमेंट/यूलिप बेहतर हैं। शुद्ध सुरक्षा के लिए टर्म प्लान बेस्ट है। एक अच्छे एजेंट के रूप में, आपको 'काम्बो' (Combo) प्लान सुझाना चाहिए।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्यों और बीमा जागरूकता के लिए है। बीमा आग्रह की विषयवस्तु है। टैक्स लाभ (Tax Benefits) वर्तमान आयकर कानूनों (Income Tax Act, 1961) के अधीन हैं और सरकार द्वारा समय-समय पर बदलाव के अधीन हैं। कमीशन की गणना केवल एक उदाहरण है और यह प्लान/कंपनी पर निर्भर करता है। कोई भी निवेश करने या पॉलिसी बेचने से पहले आधिकारिक पॉलिसी डॉक्यूमेंट और ब्रोशर को ध्यान से पढ़ें। Jeevan Bima Bazaar किसी भी वित्तीय नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं है।

12 जनवरी 2026

   

Tax Saving 2026: LIC के 3 बेस्ट प्लान जो 80C में टैक्स बचाएंगे और मोटा रिटर्न देंगे

LIC के 3 बेस्ट प्लान जो 80C में टैक्स बचाएंगे
Also available in English

2026 में स्मार्ट टैक्स प्लानिंग क्यों जरुरी है?

क्या आप भी मार्च के महीने में अपनी सैलरी स्लिप देखकर घबरा जाते हैं? टैक्स (Tax) कटना हर नौकरीपेशा व्यक्ति के लिए एक बड़ा दर्द होता है। लेकिन, अगर सही समय पर सही जगह निवेश किया जाए, तो न केवल आप अपनी मेहनत की कमाई को टैक्स कटने से बचा सकते हैं, बल्कि अपने परिवार के लिए एक मजबूत आर्थिक सुरक्षा चक्र भी तैयार कर सकते हैं।

साल 2026 आ चुका है, और महंगाई के साथ-साथ जिम्मेदारियां भी बढ़ रही हैं। ऐसे में, केवल टैक्स बचाना ही काफी नहीं है; आपको एक ऐसा निवेश चाहिए जो टैक्स बचाने के साथ-साथ आपको मैच्योरिटी (Maturity) पर अच्छा रिटर्न भी दे। भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) दशकों से हम भारतीयों का भरोसेमंद साथी रहा है।

आज के इस आर्टिकल में, हम LIC के उन 3 सबसे बेहतरीन प्लान्स (Best LIC Plans) के बारे में गहराई से जानेंगे, जो सेक्शन 80C के तहत आपको ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट दिला सकते हैं। चलिए, इस सफर की शुरुआत करते हैं।

LIC न्यू जीवन आनंद (Table 715): जिंदगी के साथ भी, बाद भी

जब भी LIC का नाम आता है, जुबान पर सबसे पहला नाम 'जीवन आनंद' का ही आता है। यह एक ऐसा प्लान है जो आपको दोहरी सुरक्षा देता है। यह प्लान न केवल आपको मैच्योरिटी पर एक मोटी रकम देता है, बल्कि मैच्योरिटी के बाद भी आपका जीवन बीमा (Risk Cover) मुफ्त में चलता रहता है।

यह प्लान उन लोगों के लिए एकदम सही है जो अपने बुढ़ापे के लिए पैसा जमा करना चाहते हैं और साथ ही यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके न रहने पर परिवार को आर्थिक मदद मिले।

मुख्य विशेषताएं:

  • बोनस की सुविधा: यह एक पार्टिसिपेटिंग प्लान है, यानी LIC के मुनाफे में आपको बोनस मिलता है।
  • लाइफटाइम रिस्क कवर: पॉलिसी की अवधि खत्म होने और पैसा मिलने के बाद भी, अगर पॉलिसीधारक की मृत्यु 100 वर्ष तक कभी भी होती है, तो नॉमिनी को सम एश्योर्ड (Sum Assured) की राशि दोबारा दी जाती है।
  • लोन और सरेंडर सुविधा (नया नियम): अब आप 1 वर्ष का पूरा प्रीमियम भरने और पॉलिसी का 1 वर्ष पूरा होने के बाद ही लोन ले सकते हैं या पॉलिसी सरेंडर कर सकते हैं। (पहले यह अवधि 2 वर्ष थी)।
पात्रता सारणी (Eligibility Table):
मापदंड (Parameter) विवरण (Details)
न्यूनतम आयु 18 वर्ष (पूर्ण)
अधिकतम आयु 50 वर्ष (निकटतम जन्मदिन)
पॉलिसी अवधि 15 से 35 वर्ष
न्यूनतम सम एश्योर्ड ₹2,00,000
अधिकतम सम एश्योर्ड कोई सीमा नहीं (आय पर निर्भर)
प्रीमियम भुगतान वार्षिक, अर्धवार्षिक, तिमाही, मासिक
ध्यान दें: जीवन आनंद में मैच्योरिटी और डेथ बेनिफिट दोनों ही इनकम टैक्स एक्ट की धारा 10(10D) के तहत टैक्स-फ्री हैं (शर्तों के अधीन)।

LIC जीवन उत्सव (Table 771): जीवन भर 10% की गारंटी

अगर आप शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से डरते हैं और 'फिक्स रिटर्न' (Guaranteed Return) चाहते हैं, तो LIC का नया प्लान 'जीवन उत्सव' (Table 771) आपके लिए गेम-चेंजर है। यह एक Non-Linked, Non-Participating प्लान है, यानी इसमें बोनस का इंतजार नहीं करना है, सब कुछ पहले दिन से तय (Guaranteed) होता है।

इस प्लान की सबसे बड़ी ताकत है "10% लाइफटाइम इनकम"। प्रीमियम भरने की अवधि खत्म होने के कुछ साल बाद से आपको हर साल सम एश्योर्ड का 10% मिलना शुरू हो जाता है, जो 100 साल की उम्र तक मिलता रहता है।

मुख्य विशेषताएं:

  • गारंटीड एडिशन्स (Guaranteed Additions): प्रीमियम भुगतान अवधि (PPT) के दौरान, हर साल आपके खाते में ₹40 प्रति हजार सम एश्योर्ड जुड़ते रहेंगे 1।
  • दो विकल्प (Options):
    • रेगुलर इनकम बेनिफिट: हर साल 10% कैश अपने बैंक खाते में लें ।
    • फ्लेक्सी इनकम बेनिफिट: अपना 10% पैसा LIC के पास जमा रहने दें। LIC इस पर आपको 5.5% सालाना चक्रवृद्धि ब्याज (Compounding Interest) देगी। आप जब चाहें अपनी जमा राशि (75% तक) निकाल सकते हैं ।
  • लाइफटाइम सुरक्षा: इनकम के साथ-साथ जीवन भर रिस्क कवर भी चलता रहता है।
पात्रता सारणी (Eligibility Table):
मापदंड (Parameter) विवरण (Details)
न्यूनतम आयु 90 दिन (16 वर्ष की टर्म के लिए) से लेकर 8 वर्ष (5 वर्ष की टर्म के लिए)
अधिकतम आयु 65 वर्ष (निकटतम जन्मदिन)
प्रीमियम भुगतान अवधि 5 से 16 वर्ष
न्यूनतम सम एश्योर्ड ₹5,00,000
इनकम शुरू होने का समय 5 से 8 साल की PPT के लिए: 11वें साल के अंत में।
9 से 16 साल की PPT के लिए: (PPT + 2 साल) के बाद। (उदा. 10 साल प्रीमियम दिया, तो 13वें साल के अंत में पैसा मिलेगा) ।
उदाहरण: अगर आप 10 साल प्रीमियम भरते हैं, तो आपको 2 साल इंतजार करना होगा (Deferment Period) और 13वें साल से जीवन भर पैसा मिलेगा। वहीँ 5 साल प्रीमियम भरने पर इंतजार 5 साल का होगा।

LIC जीवन लक्ष्य (Table 733): परिवार के सपनों का रक्षक

इसे आम भाषा में "कन्यादान पॉलिसी" के रूप में भी जाना जाता है, हालांकि यह बेटे और बेटी दोनों के लिए है। यह प्लान उन माता-पिता के लिए सबसे बेस्ट है जो अपने बच्चों की शिक्षा या शादी के लिए फंड जमा करना चाहते हैं।

इस प्लान का सबसे बड़ा जादुई फीचर है - पॉलिसीधारक की मृत्यु होने पर प्रीमियम का रुक जाना और इनकम शुरू हो जाना। अगर पॉलिसी अवधि के दौरान पॉलिसीधारक (पिता/अभिभावक) की मृत्यु हो जाती है, तो:

  • प्रीमियम माफ़: परिवार को आगे कोई प्रीमियम नहीं देना पड़ेगा।
  • सालाना इनकम: परिवार को हर साल बच्चों के खर्च के लिए सम एश्योर्ड का 10% मिलेगा (पॉलिसी मैच्योरिटी से एक साल पहले तक) ।
  • मैच्योरिटी पर बड़ी रकम: अंत में पॉलिसी खत्म होने पर सम एश्योर्ड का 110% + बोनस + फाइनल एडिशनल बोनस (यदि कोई हो) परिवार को दिया जाएगा ।
पात्रता सारणी (Eligibility Table):
मापदंड (Parameter) विवरण (Details)
न्यूनतम आयु 18 वर्ष (पूर्ण)
अधिकतम आयु 50 वर्ष (निकटतम जन्मदिन)
पॉलिसी अवधि 13 से 25 वर्ष
प्रीमियम भुगतान अवधि पॉलिसी टर्म से 3 साल कम (Term - 3)
न्यूनतम सम एश्योर्ड ₹2,00,000
अधिकतम सम एश्योर्ड कोई सीमा नहीं (आय पर निर्भर)
ध्यान दें: यह प्लान सुरक्षा और बचत का बेहतरीन कॉम्बिनेशन है, जहाँ आपके न रहने पर भी आपके द्वारा देखा गया सपना (जैसे बच्चे की पढ़ाई) पैसों की कमी से नहीं रुकता।

LIC राइडर्स: कम खर्च में डबल सुरक्षा कैसे पाएं?

अक्सर लोग पॉलिसी लेते समय सिर्फ बेसिक प्लान लेते हैं और 'राइडर्स' (Riders) को नजरअंदाज कर देते हैं। यह एक बड़ी गलती है। राइडर्स पिज्जा पर "एक्स्ट्रा चीज" की तरह हैं - थोड़ा सा खर्च, लेकिन स्वाद (सुरक्षा) दोगुना।

टैक्स सेविंग के साथ-साथ अपनी प्रोटेक्शन बढ़ाने के लिए आपको ये दो राइडर्स जरूर देखने चाहिए:

1. एक्सीडेंटल डेथ एंड डिसेबिलिटी बेनिफिट राइडर (ADDB):

जीवन अनिश्चित है। अगर दुर्घटना के कारण मृत्यु होती है, तो इस राइडर के तहत नॉमिनी को अतिरिक्त सम एश्योर्ड मिलता है। यानी अगर 5 लाख की पॉलिसी है, तो नॉर्मल डेथ पर 5 लाख, लेकिन एक्सीडेंटल डेथ पर 10 लाख + बोनस मिलेगा। साथ ही, अगर एक्सीडेंट से विकलांगता (Disability) आती है, तो 10 साल तक मासिक किश्तें मिलती हैं। इसका प्रीमियम बहुत मामूली होता है।

2. टर्म एश्योरेंस राइडर (Term Rider):

यह आपके जीवन बीमा का कवर बढ़ाने का सबसे सस्ता तरीका है। अगर पॉलिसीधारक की मृत्यु होती है, तो टर्म राइडर की राशि भी डेथ बेनिफिट में जुड़ जाती है। यह कम प्रीमियम में हाई रिस्क कवर पाने का स्मार्ट तरीका है।

प्रो टिप: पॉलिसी लेते समय अपने एजेंट से इन राइडर्स के बारे में जरुर पूछें। यह आपके प्रीमियम को थोड़ा बढ़ाएंगे, लेकिन क्लेम के समय बहुत बड़ी राहत देंगे।

केस स्टडी: रमेश की टैक्स प्लानिंग और रिटर्न (Detailed Calculation)

मान लीजिए रमेश, जिनकी उम्र 30 वर्ष है, एक प्राइवेट कंपनी में इंजीनियर हैं। वह टैक्स बचाने के लिए और रिटायरमेंट फंड के लिए LIC जीवन आनंद (915) प्लान लेते हैं।

  • सम एश्योर्ड: ₹5,00,000
  • पॉलिसी टर्म: 25 वर्ष
  • वार्षिक प्रीमियम (टैक्स सहित): लगभग ₹22,500 (पहले साल थोड़ा ज्यादा, फिर कम)
रिटर्न और लाभ का गणित (Calculation Table):
चरण रमेश द्वारा जमा/प्राप्त राशि विवरण
कुल जमा प्रीमियम ₹5,50,000 (लगभग) 25 वर्षों में थोड़ा-थोड़ा करके जमा हुआ।
मैच्योरिटी (55 की उम्र में) ₹13,00,000 (अनुमानित) सम एश्योर्ड + बोनस + फाइनल एडिशनल बोनस।
टैक्स लाभ (80C) ₹6,75,000 (अनुमानित) यदि रमेश 30% टैक्स स्लैब में हैं, तो 25 साल में इतनी टैक्स बचत।
शुद्ध लाभ मैच्योरिटी + टैक्स बचत रमेश का पैसा सुरक्षित भी रहा और बढ़ा भी।
लाइफटाइम कवर ₹5,00,000 मैच्योरिटी लेने के बाद भी, 55 की उम्र के बाद कभी भी मृत्यु होने पर परिवार को यह राशि अलग से मिलेगी।
नोट: ऊपर दिए गए बोनस के आंकड़े वर्तमान दरों पर आधारित अनुमानित (Projected) हैं। वास्तविक रिटर्न LIC द्वारा घोषित भविष्य के बोनस पर निर्भर करेगा।

LIC पॉलिसी लेने के लिए आवश्यक दस्तावेज

पॉलिसी लेते समय भागदौड़ से बचने के लिए, नीचे दिए गए दस्तावेजों को पहले से तैयार रखें। यह चेकलिस्ट (Checklist) आपके काम को आसान बना देगी:

  • पहचान का प्रमाण (Identity Proof): आधार कार्ड, पैन कार्ड, या पासपोर्ट।
  • पते का प्रमाण (Address Proof): आधार कार्ड, बिजली बिल, या ड्राइविंग लाइसेंस।
  • जन्म का प्रमाण (Age Proof): स्कूल सर्टिफिकेट (10th मार्कशीट), जन्म प्रमाण पत्र, या पैन कार्ड।
  • आय का प्रमाण (Income Proof): अगर सम एश्योर्ड ज्यादा है तो ITR फाइल या सैलरी स्लिप (Salary Slip) की जरुरत पड़ सकती है।
  • तस्वीर: 2 पासपोर्ट साइज कलर फोटो।
  • बैंक विवरण: कैंसिल चेक (NEFT द्वारा मैच्योरिटी पाने के लिए)।

मेडिकल चेकअप: आपकी उम्र और सम एश्योर्ड की राशि के आधार पर, कभी-कभी LIC मेडिकल टेस्ट की मांग कर सकती है, जिसका खर्च आमतौर पर LIC उठाती है।

निष्कर्ष

2026 में टैक्स बचाना जरुरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरुरी है अपने परिवार के भविष्य को सुरक्षित करना। LIC के ये तीनों प्लान – जीवन आनंद, जीवन उत्सव और जीवन लक्ष्य – अलग-अलग जरूरतों को पूरा करते हैं।

  • रिटायरमेंट और लाइफटाइम कवर के लिए -> जीवन आनंद चुनें।
  • गारंटीड इनकम के लिए -> जीवन उत्सव चुनें।
  • बच्चों के भविष्य के लिए -> जीवन लक्ष्य चुनें।

देर न करें, क्योंकि आपकी उम्र बढ़ने के साथ प्रीमियम भी बढ़ता है। आज ही निर्णय लें!

अगर आप कंफ्यूज हैं कि आपके लिए कौन सा प्लान सही है, तो हमें कमेंट करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हाँ, इनकम टैक्स की धारा 10(10D) के तहत, अगर आपका वार्षिक प्रीमियम सम एश्योर्ड के 10% से ज्यादा नहीं है, तो मिलने वाली मैच्योरिटी राशि पूरी तरह टैक्स-फ्री होती है।

बिल्कुल! आप अपनी आय और जरुरत के हिसाब से जितनी चाहें उतनी पॉलिसी ले सकते हैं। इसे 'ह्यूमन लाइफ वैल्यू' (HLV) के आधार पर तय किया जाता है।

अगर आपने कम से कम 2 साल (कुछ प्लान में 3 साल) प्रीमियम भरा है, तो आपकी पॉलिसी 'पेड-अप' (Paid-up) हो जाती है। आपको पैसा तो मिलेगा, लेकिन कम होकर। बेहतर यही है कि पॉलिसी को लेप्स न होने दें।

अगर आपको सिर्फ सुरक्षा चाहिए और पैसा वापस नहीं चाहिए, तो टर्म प्लान लें। लेकिन अगर आप 'सुरक्षा + बचत' (Tax Saving + Return) दोनों चाहते हैं, तो ऊपर बताए गए प्लान (आनंद, उत्सव, लक्ष्य) बेहतर हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। बीमा एक आग्रह की विषयवस्तु है। निवेश करने से पहले पॉलिसी ब्रशर पढ़ें और अपने वित्तीय सलाहकार या LIC एजेंट से परामर्श अवश्य लें। पिछले प्रदर्शन भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं हैं।

10 जनवरी 2026

   

क्लेम रिजेक्शन क्यों होता है? ‘Medical Necessity’ और आपके कानूनी अधिकार

Medical Necessity और आपके कानूनी अधिकार
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बीमारी बताकर नहीं आती, और जब आती है तो हम सबसे पहले डॉक्टर की सलाह मानते हैं। अगर डॉक्टर कहते हैं, "मरीज को तुरंत एडमिट करना पड़ेगा," तो हम एक पल भी नहीं सोचते। लेकिन सोचिए, इलाज के बाद जब आप इंश्योरेंस कंपनी को बिल भेजते हैं, और वहां से जवाब आता है— "क्लेम रिजेक्टेड: मरीज को अस्पताल में भर्ती होने की ज़रूरत नहीं थी, घर पर इलाज हो सकता था।"

यह सुनना किसी सदमे से कम नहीं होता। लाखों का प्रीमियम भरने के बाद भी अगर अपनी जेब से इलाज करवाना पड़े, तो पॉलिसी का क्या फायदा?

आज के इस आर्टिकल में हम लाइफ इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़े एक सबसे पेचीदा शब्द 'Medically Necessary Hospitalization' (अस्पताल में भर्ती होने की चिकित्सीय आवश्यकता) को डिकोड करेंगे। हम एक सत्यापित कोर्ट केस के जरिए समझेंगे कि कानून आपके साथ कैसे खड़ा है और एक एजेंट या पॉलिसी होल्डर के रूप में आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

'Medically Necessary Hospitalization' आखिर है क्या?

साधारण भाषा में समझें तो इसका मतलब है—क्या मरीज की हालत इतनी गंभीर थी कि उसका इलाज घर पर न होकर सिर्फ अस्पताल में ही हो सकता था?

IRDAI (भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण) की परिभाषा के अनुसार, कोई भी इलाज 'Medically Necessary' तब माना जाता है जब:

  • वह डॉक्टर द्वारा लिखित में (Prescribed) हो।
  • इलाज का स्तर (Level of Care) सुरक्षित और उचित हो।
  • वह इलाज भारत या अंतरराष्ट्रीय मेडिकल मानकों (Standards) के अनुरूप हो।
  • वह केवल मरीज की सुविधा या आराम (जैसे पर्सनल नर्स या लग्जरी रूम) के लिए न हो।

नोट: IRDAI की विस्तृत परिभाषा वाली PDF फाइल हमारी वेबसाइट पर उपलब्ध करा दी जाएगी, जिसे आप डाउनलोड कर सकते हैं।

'डे-केयर ट्रीटमेंट' और 'घर पर इलाज' में अंतर

अक्सर लोग सोचते हैं कि क्लेम लेने के लिए अस्पताल में कम से कम 24 घंटे भर्ती रहना अनिवार्य है। लेकिन मेडिकल साइंस की तरक्की और इंश्योरेंस के नियमों ने अब इसे बदल दिया है। 'Medically Necessary' को ठीक से समझने के लिए इन दो शर्तों को जानना ज़रूरी है:

  • डे-केयर ट्रीटमेंट (Day Care Treatment):

    टेक्नोलॉजी इतनी आगे बढ़ गई है कि जो सर्जरी या इलाज पहले 2-3 दिन लेते थे, अब वो कुछ घंटों में हो जाते हैं। जैसे मोतियाबिंद (Cataract), कीमोथेरेपी, या डायलिसिस।

    नियम: इसे 'भर्ती' ही माना जाता है, भले ही आप 24 घंटे से कम समय के लिए अस्पताल में हों। लेकिन, यह इलाज पॉलिसी में लिस्टेड होना चाहिए।

  • डोमिसिलीरी हॉस्पिटलाइजेशन

    इसे आम भाषा में "घर पर इलाज" कहते हैं। लेकिन सावधान रहें! यह आपकी 'मर्जी' (Choice) से नहीं, बल्कि 'मजबूरी' (Condition) में मिलता है।

    नियम: इसका क्लेम तभी मिलता है जब मरीज की हालत इतनी गंभीर हो कि उसे अस्पताल नहीं ले जाया जा सकता, या अस्पताल में कोई बेड खाली न हो। सिर्फ इसलिए कि "मुझे अस्पताल पसंद नहीं है," आप इसका क्लेम नहीं ले सकते।

एक नज़र में अंतर समझें:

आधार डे-केयर ट्रीटमेंट डोमिसिलीरी हॉस्पिटलाइजेशन
स्थान अस्पताल या क्लिनिक में होता है। मरीज के घर पर होता है।
समय 24 घंटे से कम। आमतौर पर 3 दिन से अधिक का इलाज।
वजह तकनीकी उन्नति के कारण इलाज जल्दी हो जाता है। मरीज की गंभीर हालत या अस्पताल में बेड की कमी।
उदाहरण मोतियाबिंद सर्जरी, रेडियोथेरेपी, डायलिसिस। लकवा (Paralysis), गंभीर अस्थमा, या कोमा जैसी स्थिति (यदि डॉक्टर घर पर सेटअप लगाए)।
क्लेम की शर्त इलाज 'डे-केयर लिस्ट' में होना चाहिए। डॉक्टर का प्रमाण पत्र ज़रूरी है कि "अस्पताल ले जाना संभव नहीं था।"

समस्या कहाँ आती है?

अक्सर विवाद तब होता है जब आपके डॉक्टर को लगता है कि "भर्ती करना ज़रूरी है," लेकिन इंश्योरेंस कंपनी के डॉक्टर्स की टीम को लगता है कि "यह इलाज तो गोलियों से घर पर भी हो सकता था।" इसे "Active Line of Treatment" का मुद्दा कहा जाता है।

कंपनियां अक्सर यह कहकर क्लेम रोक देती हैं कि आप सिर्फ 'ऑब्जर्वेशन' (निगरानी) या 'आइसोलेशन' के लिए भर्ती हुए थे। लेकिन क्या कंपनी का फैसला अंतिम होता है? जवाब है— नहीं!

केस स्टडी: जब कोर्ट ने कहा— "इलाज का फैसला डॉक्टर करेगा, बीमा कंपनी नहीं"

आइए, एक हालिया और महत्वपूर्ण केस पर नज़र डालते हैं जो हर पॉलिसीहोल्डर के लिए एक जीत की तरह है। यह जानकारी सत्यापित शोध पर आधारित है।

मामला: अजय नागर और नीतू नागर बनाम स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस।

घटना: जनवरी 2022 (कोविड-19 की तीसरी लहर)।

क्या हुआ था: नीतू नागर को तेज बुखार और सांस लेने में तकलीफ हुई। डॉक्टर ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की सलाह दी। इलाज हुआ, मरीज ठीक होकर घर आ गया। लेकिन जब क्लेम फाइल किया गया, तो स्टार हेल्थ (Star Health) ने यह कहकर क्लेम खारिज कर दिया कि मरीज के लक्षण "हल्के" (Mild) थे और उनका इलाज घर पर आइसोलेशन में किया जा सकता था।

कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला (दिसंबर 2025): जिला उपभोक्ता फोरम ने इस मामले में पॉलिसीहोल्डर के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि:

"बीमा कंपनी एसी कमरे में बैठकर यह तय नहीं कर सकती कि मरीज का इलाज कैसे होना चाहिए। मरीज को भर्ती करना है या नहीं, यह फैसला केवल इलाज कर रहे डॉक्टर का ही सर्वोपरि माना जाएगा।"

नतीजा: कोर्ट ने स्टार हेल्थ को सेवा में कमी का दोषी पाया और आदेश दिया कि वे:

  • ₹50,000 का हर्जाना दें।
  • इस राशि पर 6% वार्षिक ब्याज दें।
  • ₹2,000 कानूनी खर्च (Litigation Cost) के रूप में भुगतान करें।

यह केस साबित करता है कि अगर आपके पास सही कागजात हैं और डॉक्टर की सलाह पक्की है, तो इंश्योरेंस कंपनी मनमानी नहीं कर सकती।

बीमा लोकपाल (Ombudsman): आपकी मदद के लिए एक मज़बूत साथी

अगर कंपनी आपकी बात न सुने, तो आपको सीधे कोर्ट जाने की भी ज़रूरत नहीं है। आप बीमा लोकपाल (Insurance Ombudsman) के पास जा सकते हैं। यह प्रक्रिया बहुत सरल और निशुल्क है।

नई अपडेट (नवंबर 2023 के बाद): पहले लोकपाल केवल 30 लाख रुपये तक के क्लेम सुनता था, लेकिन अब यह सीमा बढ़ा दी गई है।

विवरण पुरानी सीमा नई सीमा (वर्तमान)
अधिकतम क्लेम राशि ₹30 लाख ₹50 लाख
मानसिक पीड़ा का मुआवजा कम था ₹1 लाख तक
परिणामी हानि कम था ₹20 लाख तक
ध्यान दें: यह 50 लाख की सीमा में आपके क्लेम की राशि + मानसिक उत्पीड़न का मुआवजा शामिल है। अगर आपका मामला 50 लाख से ऊपर का है, तो आपको कंज्यूमर कोर्ट या अन्य कानूनी रास्ते अपनाने होंगे।

नॉन-मेडिकल खर्च (Non-Medical Expenses)

अक्सर ऐसा होता है कि कंपनी मान लेती है कि आपका हॉस्पिटलाइजेशन "Medically Necessary" (ज़रूरी) था, क्लेम पास भी हो जाता है, लेकिन जब बैंक में पैसे आते हैं, तो वो आपके बिल से 10-20% कम होते हैं।

गुस्सा आना लाज़िमी है, लेकिन इसका कारण छिपा होता है 'Non-Medical Expenses' (गैर-चिकित्सकीय खर्च) की लिस्ट में।

ये 'नॉन-मेडिकल खर्च' क्या हैं- इंश्योरेंस कंपनियां मानती हैं कि वे आपके 'इलाज' का पैसा देंगी, आपकी 'सुविधा' या 'साफ-सफाई' के सामान का नहीं। इसे Consumables भी कहा जाता है। इसमें आम तौर पर शामिल होते हैं:

  • ग्लव्स, मास्क, और पीपीई किट (PPE Kits)।
  • सैनिटाइजर, साबुन, या टिशू पेपर।
  • हॉउसकीपिंग चार्ज या रजिस्ट्रेशन फीस।
  • डाइपर, सिरिंज, या डिस्पोजेबल रेज़र।

हालांकि, IRDAI के नए दिशा-निर्देशों (2024-25) के बाद कई कंपनियों ने अब इन खर्चों को कवर करना शुरू कर दिया है, लेकिन यह तभी मिलता है जब आपने अपनी पॉलिसी में 'Consumables Rider' या 'Care 360' जैसा कोई ऐड-ऑन (Add-on) लिया हो।

ध्यान दें: अगर आपकी पॉलिसी पुरानी है (3-4 साल पहले की), तो हो सकता है कि उसमें ये खर्च कवर न हों। इसलिए क्लेम फाइल करते समय अपनी जेब से 5-10 हज़ार रुपये भरने के लिए मानसिक रूप से तैयार रहें, भले ही आपका क्लेम 100% पास हो जाए।

अब आपको क्या करना चाहिए?

एक जागरूक पॉलिसीहोल्डर या स्मार्ट एजेंट के तौर पर, आपको क्लेम रिजेक्शन से बचने के लिए डिस्चार्ज के समय ही सतर्क रहना होगा। यहाँ कुछ ज़रूरी टिप्स हैं:

फ्री डाउनलोड: IRDAI की आधिकारिक परिभाषा

सिर्फ सुनी-सुनाई बातों पर निर्भर न रहें। जब आप इंश्योरेंस कंपनी या लोकपाल (Ombudsman) के सामने अपना पक्ष रखें, तो आपके हाथ में लिखित सबूत होना चाहिए।

हमने आपके लिए IRDAI की वेबसाइट से 'Medically Necessary' की आधिकारिक परिभाषा की PDF फाइल यहाँ उपलब्ध कराई है। इसे डाउनलोड करें और अपने पास सुरक्षित रखें। भविष्य में क्लेम विवाद के समय यह दस्तावेज आपके लिए 'ब्रह्मास्त्र' का काम करेगा।

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डिस्चार्ज समरी को ध्यान से पढ़ें

यह सिर्फ दवाइयों की पर्ची नहीं, बल्कि आपका सबसे बड़ा कानूनी सबूत है। अपने डॉक्टर से निवेदन करें कि वे डिस्चार्ज समरी में यह साफ़-साफ़ लिखें कि "भर्ती करना क्यों अनिवार्य था।"

  • गलत तरीका: "मरीज को बुखार था, एडमिट किया गया।"
  • सही तरीका: "मरीज को 103 डिग्री बुखार था जो ओरल दवाइयों से कम नहीं हो रहा था, साथ ही ऑक्सीजन लेवल गिर रहा था, इसलिए IV फ्लूड और निरंतर निगरानी के लिए भर्ती करना चिकित्सकीय रूप से आवश्यक (Medically Necessary) था।"

कागजी कार्रवाई पूरी रखें

डॉक्टर की पहली पर्ची (Prescription) जिसमें 'Admission Advised' लिखा हो, उसे कभी न खोएं।

हार न मानें

अगर कंपनी क्लेम रिजेक्ट करे, तो उसे अंतिम फैसला न समझें। पहले कंपनी के 'Grievance Redressal Officer' को लिखें। अगर 30 दिनों में जवाब न मिले या आप संतुष्ट न हों, तो बीमा लोकपाल (Ombudsman) का दरवाजा खटखटाएं।

स्मार्ट चेकलिस्ट

अस्पताल छोड़ते समय (Discharge) ये 5 कागज़ जरूर चेक करें, जल्दबाजी में डिस्चार्ज न लें। काउंटर छोड़ने से पहले अपनी फाइल में ये चीज़ें टिक करें:

  • डिस्चार्ज समरी (Discharge Summary): सबसे महत्वपूर्ण! चेक करें कि इसमें "Admission Reason" (भर्ती का कारण) साफ लिखा हो।
  • फाइनल बिल (Detailed Breakup): सिर्फ कुल रकम नहीं, बल्कि हर सुई और दवा का अलग-अलग हिसाब (Breakup) मांगें।
  • लैब रिपोर्ट्स (Lab Reports): एक्स-रे फिल्मों और एमआरआई (MRI) की ओरिजिनल रिपोर्ट और फिल्में साथ लें।
  • फार्मेसी बिल: अस्पताल के अंदर से खरीदी गई दवाइयों के पक्के बिल, जिन पर डॉक्टर की पर्ची (Prescription) मैच होती हो।
  • पेमेंट रसीद: अगर आपने कैशलेस नहीं, बल्कि रिइम्बर्समेंट (Reimbursement) क्लेम करना है, तो 'Paid Stamp' लगी हुई रसीद लेना न भूलें।

निष्कर्ष

इंश्योरेंस पॉलिसी सिर्फ एक कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि मुसीबत के समय आपका सुरक्षा कवच है। 'Medically Necessary' जैसे शब्दों को कंपनी को अपने खिलाफ इस्तेमाल न करने दें। जैसा कि हमने अजय नागर जी के केस में देखा, कानून उपभोक्ता के साथ है, बशर्ते आप अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों।

अगर आप एक एजेंट हैं, तो अपने ग्राहकों को यह जानकारी जरूर दें। इससे न सिर्फ उनका क्लेम पास होगा, बल्कि आप पर उनका भरोसा भी बढ़ेगा।

अगला कदम: क्या आप चाहते हैं कि मैं आपको "बीमा लोकपाल में शिकायत दर्ज करने का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका" समझाऊं? नीचे कमेंट करके बताएं!

डॉक्टर की सलाह पर अस्पताल में भर्ती होने से क्लेम मिलने की संभावना काफ़ी बढ़ जाती है, लेकिन यह अपने-आप में क्लेम की गारंटी नहीं होती।

बीमा कंपनी आमतौर पर यह देखती है कि भर्ती के दौरान Active Treatment हुआ है या नहीं। अगर मरीज को केवल आराम, निगरानी (Observation) या सामान्य टेस्ट के लिए एडमिट किया गया है, और इलाज सक्रिय रूप से नहीं चला, तो क्लेम पर आपत्ति हो सकती है।

इसलिए डिस्चार्ज समरी में भर्ती होने का स्पष्ट और ठोस मेडिकल कारण, इलाज की प्रक्रिया और दिए गए उपचार का उल्लेख होना बहुत महत्वपूर्ण होता है।

नहीं, बीमा लोकपाल अब केवल 50 लाख रुपये तक के मामलों (मुआवजे सहित) को सुन सकता है। इससे बड़े क्लेम के लिए आपको उपभोक्ता अदालत (Consumer Court) जाना होगा।

क्लेम रिजेक्ट होने के बाद आपके पास शिकायत करने के लिए एक निश्चित समय सीमा (आमतौर पर 1 साल लोकपाल के लिए) होती है। अपने पॉलिसी दस्तावेजों में दिए गए समय को चेक करें या किसी एक्सपर्ट से सलाह लें।

इसकी परिभाषा IRDAI द्वारा तय की गई है और यह मेडिकल साइंस के मानकों पर आधारित होती है। कोई भी इंश्योरेंस कंपनी अपनी मर्जी से इसे बदल नहीं सकती।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। यह कानूनी या पेशेवर वित्तीय सलाह नहीं है। किसी भी कानूनी कार्यवाही या क्लेम फाइलिंग के लिए, कृपया अपनी पॉलिसी के नियम और शर्तों को ध्यान से पढ़ें और किसी प्रमाणित बीमा सलाहकार या वकील से संपर्क करें। YMYL (Your Money Your Life) दिशानिर्देशों के तहत, हम सटीक जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन नियमों में बदलाव संभव है।